Monday, March 10, 2025

 अहंकार को मिटाते मिटाते धर्म अहंकार को बडाने मे लगे।


धर्म का सबसे अहम कार्य घमंड अहंकार को समाप्त करना ।घमंड को खत्म करने के लिए भगवान ने अवतार लिए रावण ,हिरण्यकशिपु, दुर्योधन,कंस जैसे अनेको को समाप्त किया गया। धर्म का पहला असर व्यक्ति का अहंकार समाप्त होने लगता है ।


लेकिन अब धार्मीक कहलाने वाले लोगो ने अहंकार दिखाने पर इनाम रखा है। महावीर स्वामी जी को अहंकार के विरूद्ध कह सकते है जिन्होने हर वस्तु त्याग दी कठिनतम तप किए और अब उन्ही के मंदिरो मे अहंकार से बोली लगाई जाती है ध्वजा कि आरती कि मंदिर निर्माण कि ।उची बोली लगाकर वह समाज के सामने आरती कर अहंकार मे रहता है देखो तुम्हारी क्या औकात धन दौलत से मे धर्म भी खरीद लेता हू। यदी व्यक्ति मे अहंकार नही होता तो वह मंदिर मे कभी भी एक दीपक लेकर आरती कर सकता था और बोली भी नही लगानी पडती दान पेटी मे डाल देता । लेकिन जब अहंकार होता है तो वह दिखाना चाहता है समाज के सामने । आज हर धर्म मे   समाज मे हर तरह कि बोली लगाकर समाज मे अहंकार को प्रोत्साहित पुरस्कृत किया जाता है। समाज मे धन इक्कठा करने के लिए धर्म को हि निगल जाते है और संत कहलाते है । गीता मे कृष्ण कहते है दान छुपा कर दिया जाए किसी को पता न चले लेकिन वही धार्मिक लोग अहंकार कि बोली को दान कहने लगे ।

 मैदा के बने खाद्य पदार्थ क्यों नहीं खाने चाहिऐ ?


1. जैसे ही मैदा से बने चीजें - समोसे, कचौरी, ब्रेड, पाव, बिस्किट, खारी, टोस्ट, नानखटाई, पास्ता, बर्गर, पिज्जा, नूडल्स, नाॕन, तंदूरी रोटी आदि खाते हैं, शरीर में शर्करा (शुगर) का लेवल बढ जाता है (क्योंकि मैदा में ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है) इसलिए अग्न्याशय (Pancreas) को पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन छोड़ने के लिए जरूरत से ज्यादा सक्रिय होना पड़ता है। लेकिन मैदा का बहुत अधिक सेवन हो तो इंसुलिन का बनना धीरे-धीरे कम हो जाता है और डायबिटीज हो जाती है।


2. मैदा में अलोक्जल केमिकल होता है जो अग्न्याशय (Pancreas) की इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को मारकर टाइप 2 डायबिटीज पैदा करता है।


3. मैदा कब्ज करता है। क्योंकि इसके कण बहुत ही बारीक हैं, डाइजेसिटिव जूस इसमें मिक्स ना होने से पूरा डाइजेसन नहीं हो पाता है।


4. मैदा को 'सफेद जहर' और 'आंत का गोंद' भी कहते हैं।


5. मैदा से बने ढेरों चीजें एसिडिटी बढाती हैं व इसको बेलेन्स करने के लिए हड्डियों से कैल्शियम सोख लेती है जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, और लम्बे समय तक इनके सेवन से स्थायी सूजन, गठिया आदि कष्टसाध्य बीमारियां हो जाती हैं।


6. अधिक मात्रा में मैदे के सेवन से हानिकारक कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) का बढ़ जाता है। इसके कारण वजन बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर और चित्त में अस्थिरता (मूड स्विंग) की शिकायत हो जाती है।


7. मैदा और इससे बनी चीजों का अधिक मात्रा में सेवन आपको मोटापे की ओर ले जाता है। इसके अलावा, इसके सेवन से आपको अधिक भूख महसूस होती है और मीठा खाने की तलब बढ़ जाती है।


8. मैदा से एलर्जी भी हो सकती है क्योंकि इसमें ग्लूटेन भी ज्यादा होता है।


9. मैदा और इससे बनी चीजें आंतों में चिपक जाते हैं। इसमें पोषक तत्व व फाइबर नहीं होता जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है और फलस्वरूप मेटाबोलिज्म सुस्त पड़ जाता है जिस से अपच की समस्या होने लगती है। 

इसके अलावा यह तनाव, सिरदर्द और माइग्रेन का कारण भी बन जाता है।

 कपालभाती के विषय में अच्छी जानकारी दी है।    


कपालभाती को बीमारी दूर करनेवाले प्राणायाम के रूप में देखा जाता है। मैने ऐसे पेशंट्स को देखा है, जो बिना बैसाखी के चल नही पाते थे, लेकिन नियमित कपालभाती करने के बाद उनकी बैसाखी छूट गई और वे ना सिर्फ चलने, बल्कि दौड़ने भी लगे। कपालभाती करने वाला साधक आत्मनिर्भर और स्वयंपूर्ण हो जाता है।


कपालभाती से हार्ट के ब्लॉकेजेस् पहिले ही दिन से खुलने लगते हैं और 15 दिन में बिना किसी दवाई के वे पूरी तरह खुल जाते है। 


कपालभाती करने वालों के हृदय की कार्यक्षमता बढ़ती है, जबकि हृदय की कार्यक्षमता बढ़ाने वाली कोई भी दवा उपलब्ध नही है। 🌹कपालभाती करनेवालों का हृदय कभी भी अचानक काम करना बंद नही करता, जबकि आजकल बड़ी संख्या में लोग अचानक हृदय बंद होने से मर जाते हैं। 

     

🌹कपालभाती करने से  शरीरांतर्गत और शरीर के ऊपर की किसी भी तरह की गाँठ गल जाती है, क्योंकि कपालभाती से शरीर में जबर्दस्त उर्जा निर्माण होती है, जो गाँठ को गला देती है, फिर वह गाँठ चाहे ब्रेस्ट की हो अथवा अन्य कही की। ब्रेन ट्यूमर हो अथवा ओव्हरी की सिस्ट हो या यूटेरस के अंदर फाइब्रॉईड हो, क्योंकि सबके नाम भले ही अलग हो, लेकिन गाँठ बनने की प्रक्रिया एक ही होती है। 


🌹कपालभाती से बढा हुआ कोलेस्टेरोल कम होता है। खास बात यह है कि, मैं कपालभाती शुरू करने के प्रथम दिन से ही मरीज की कोलेस्टेरॉल की गोली बंद करवाता हूँ।

    

🌹कपालभाती से बढा हुआ इएसआर, युरिक एसिड, एसजीओ, एसजीपीटी, क्रिएटिनाईन, टीएसएच, हार्मोन्स, प्रोलेक्टीन आदि सामान्य स्तर पर आ जाते है। 


🌹कपालभाती करने से हिमोग्लोबिन एक महिने में 12 तक पहुँच जाता है, जबकि हिमोग्लोबिन की एलोपॅथीक गोलियाँ खाकर कभी भी किसी का हिमोग्लोबिन इतना बढ़ नही पाता है। कपालभाती से हीमोग्लोबिन एक वर्ष में 16 से 18 तक हो जाता है। महिलाओं में हिमोग्लोबिन 16 और पुरुषों में 18 होना उत्तम माना जाता है।


🌹कपालभाती से महिलाओं के मासिक धर्म की सभी शिकायतें एक महिने में सामान्य हो जाती है। 


🌹कपालभाती से थायरॉईड की बीमारी एक महिने में ठीक हो जाती है। इसकी गोलियाँ भी पहिले दिन से बंद की जा सकती है।


🌹🌹इतना ही नही, बल्कि कपालभाती करने वाला साधक ५ मिनिट में मन के परे पहुँच जाता है। गुड़ हार्मोन्स का सीक्रेशन होने लगता है। स्ट्रेस हार्मोन्स गायब हो जाते है। मानसिक व शारीरिक थकान नष्ट हो जाती है। इससे मन की एकाग्रता भी आती है। 


कपालभाति के कई विशेष लाभ भी हैं। 


🌹कपालभाती से खून में प्लेटलेट्स बढ़ते हैं। व्हाइट ब्लड सेल्स या रेड ब्लड सेल्स यदि कम या अधिक हुए हो, तो वे निर्धारित मात्रा में आकर संतुलित हो जाते हैं

🌹कपालभाती से सभी कुछ संतुलित हो जाता है। ना तो कोई अंडरवेट रहता है, ना ही कोई ओव्हरवेट रहता है। अंडरवेट या ओव्हरवेट होना, दोनों ही बीमारियाँ है।

     

🌹कपालभाती से कोलायटीस, अल्सरीटिव्ह कोलायटीस, अपच, मंदाग्नी, संग्रहणी, जीर्ण संग्रहणी, आँव जैसी बीमारियाँ ठीक होती है। काँस्टीपेशन, गैसेस, एसिडिटी भी ठीक हो जाती है। पेट की समस्त बीमारियाँ ठीक हो जाती है।


🌹कपालभाती से सफेद दाग, सोरायसिस, एक्झिमा, ल्युकोडर्मा, स्कियोडर्मा जैसे त्वचारोग ठीक होते हैं। स्कियोडर्मा पर कोई दवाई उपलब्ध नही है, लेकिन यह कपालभाती से ठीक हो जाता है। अधिकतर त्वचा रोग पेट की खराबी से होते है। जैसे जैसे पेट ठीक होता है, ये रोग भी ठीक होने लगते हैं।


🌹कपालभाती से छोटी आँत को शक्ति प्राप्त होती है, जिससे पाचन क्रिया सुधर जाती है। पाचन ठीक होने से शरीर को कैल्शियम, मैग्नेशियम, फॉस्फरस, प्रोटीन्स इत्यादि उपलब्ध होने से कुशन्स, लिगैमेंट्स, हड्डियाँ ठीक होने लगती हैं और 3 से 9 महिनों में अर्थ्राइटीस, एस्ट्रो अर्थ्राइटीस, एस्ट्रो पोरोसिस जैसे हड्डियों के रोग हमेशा के लिए ठीक हो जाते हैं। 


ध्यान रखिये की कैल्शियम, प्रोटीन्स, हिमोग्लोबिन, व्हिटैमिन्स आदि को शरीर बिना पचाए, बाहर निकाल देता है, क्योंकि केमिकल्स से बनाई हुई इस प्रकार की औषधियों को शरीर द्वारा सोखे जाने की प्रक्रिया हमारे शरीर के प्रकृति में ही नही है।


💐हमारे शरीर में रोज 10 % बोनमास चेंज होता रहता है। यह प्रक्रिया जन्म से मृत्यु तक निरंतर चलती रहती है। अगर किसी कारणवश यह बंद हुई, तो हड्डियों के विकार हो जाते हैं।💐 🌹🌹🌹कपालभाती इस प्रक्रिया को निरंतर चालू रखती है। इसीलिए कपालभाती नियमित रूप से करना आवश्यक है।


सोचिए, यह सिर्फ एक क्रिया कितनी लाभकारी है। इसीलिए नियमित रूप से कपालभाति करना, यह एक उत्तम व्यायाम प्रक्रिया है।कपाल भांति ने वह कमी पूरी कर रखी है। नित्य दस पंद्रह मिनट पर्याप्त होते हैं ।

शशिरंजनभट्ट




 

Wednesday, July 1, 2020

वाह रे मारा मोदी जी
मान गए गुरु
इसको पुरा पढ़े जी तभी आपको पता चलेगा हुक्म 🌹👏👏🤛🤛👌

ये नरेन्द्र दामोदरदास मोदी है ,जिसके दिमाग को विश्व के चुनिन्दा , चतुर नेता नही समझ पा रहे हैं...और देश में बैठी तथाकथित वामपंथियो ओर उनके साथियों की फ़ौज गरियाती फ़िर रही है...ऐसी जगह ले जाकर छोडेगा जहाँ से वापसी भी संभव नही होगी...

मोदी ने हिंद महासागर में बसाए भारत के दो ‘सीक्रेट आइलैंड’

ये एक ऐसी खबर है जिसके बारे में हमारे देश में ज्यादातर लोगों को पता नहीं है। दरअसल यह भारत का एक सीक्रेट मिशन है, जिसने चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों की नींद उड़ा रखी है।

भारत की समुद्री सीमा से दूर हिंद महासागर में 2 फौजी अड्डे स्थापित किए जा चुके हैं। मतलब यह कि भारतीय सेना ने इन आइलैंड पर अपना मिलिट्री बेस बनाया है। दुनिया के नक्शे में इन दोनों द्वीपों की लोकेशन इतनी जबर्दस्त है कि चीन और पाकिस्तान परेशान हैं।

इनके नाम हैं- अगालेगा और अजंप्शन आइलैंड। इन द्वीपों पर भारतीय सेना आधुनिक हथियारों और साजो-सामान के साथ मौजूद है। बेहद खुफिया तरीके से यहां भारतीय सेना खुद को मजबूत बनाने में जुटी है।

अगालेगा आइलैंड पर तो भारत ने बाकायदा एयरपोर्ट भी बनाया है। जबकि अज़ंप्शन आइलैंड पर आने जाने के लिए हवाई पट्टी बनाई गई है। इन दोनों आइलैंड्स को भारत को सौंपे जाने पर चीन और यहां तक कि भारत के वामपंथी पत्रकारों ने बहुत अड़ंगेबाजी की।

इस सैनिक समझौते के खिलाफ कई झूठी खबरें उड़वाई गईं। आज इन दोनों द्वीपों पर क्या चल रहा है इसका बाकी दुनिया सिर्फ अंदाजा लगा सकती है। क्योंकि यहां भारतीय सेना के अलावा किसी को जाने की छूट नहीं है।

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभालने के फौरन बाद जिन देशों की यात्रा की थी, उनमें मॉरीशस और सेशेल्स भी थे। सरकार ने औपचारिक तौर पर बताया कि ये दौरा दोनों देशों के आपसी रिश्ते सुधारने और काले धन पर बातचीत के लिए है। लेकिन असली मकसद कुछ और ही था।

इस यात्रा में मोदी ने सेशल्स और मॉरीशस को इस बात के लिए मना लिया कि वो अपने 1-1 द्वीप भारत को लीज़ पर देंगे। इसी दौरे में शुरुआती समझौते पर दस्तखत भी कर लिए गए।

अगालेगा आइलैंड मॉरीशस में पड़ता है, जबकि अजंप्शन द्वीप सेशेल्स देश का हिस्सा है। हिंद महासागर में ये वो लोकेशन थी जिसके महत्व की चीन को भी कल्पना नहीं थी। डील पर दस्तखत होने के कुछ दिन बाद जब मामला मीडिया में आया तो भारत में चीन के लिए प्रोपेगेंडा करने वाले पत्रकार और चीन सरकार बुरी तरह बौखला गए।

यही वो समय था जब मीडिया ने पीएम मोदी की विदेश यात्राओं की खिल्ली उड़ानी शुरू कर दी। क्योंकि उन्हें लग गया था कि पीएम मोदी इन यात्राओं के जरिए कुछ ऐसा कर रहे हैं जो वो नहीं चाहते कि मीडिया को पता चले।

इन दोनों द्वीपों के लिए की गई संधियों को रद्द कराने के लिए वहां के विपक्षी दलों के जरिए भी दबाव बनाए गए। इन्हीं का नतीजा था कि अज़ंप्शन आइलैंड के लिए आखिरी समझौते पर दस्तखत जनवरी 2018 में हो सका।

अगालेगा आइलैंड मॉरीशस के मुख्य द्वीप से 1100 किलोमीटर दूर उत्तर यानी भारत की तरफ है। ये सिर्फ 70 वर्ग किलोमीटर दायरे में है। इसी तरह सेशल्स का अज़ंप्शन आइलैंड वहां के 115 द्वीपों में से एक है। ये सिर्फ 11 वर्ग किमी की जमीन है, जो कि मेडागास्कर के उत्तर में हिंद महासागर में है।

 भारत अरब देशों से कच्चा तेल खरीदता है। ये तेल हिंद महासागर के रास्ते ही आता है। कच्चा तेल जिस रूट से आता है वो उन जगहों से काफी करीब है जहां पर चीन बीते कुछ साल में अपना दबदबा बना चुका है। वो इन जगहों पर बैठे-बैठे जब चाहे भारत की तेल की सप्लाई लाइन काट सकता है।

ऐसे में भारत को समंदर में एक ऐसी लोकेशन की जरूरत थी, जहां से वो न सिर्फ अपने जहाजों को सुरक्षा दे सके, बल्कि जरूरत पड़ने पर चीन की सप्लाई लाइन पर भी वार कर सके। ये वो रणनीति थी जिसकी कल्पना चीन भी नहीं कर सका था।

उसे भरोसा था कि भारत की सरकारें हिंद महासागर पर कब्जे की चीन की रणनीति को कभी समझ नहीं पाएंगी। चीन के रणनीतिकार अपने इस प्लान को ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ (मोतियों की माला) कहते हैं। ये वो रणनीति है जिससे उसने एक तरफ भारत को दबोच लिया था साथ ही अमेरिका के लिए भी मुश्किल हालात पैदा कर दिए थे।

पीएम मोदी ने इस खतरे को भांपते हुए चीन के जवाब में ‘स्ट्रिंग ऑफ फ्लावर्स’ (फूलों की माला) नाम से रणनीति बनाई। इसी के तहत सबसे पहले अज़म्प्शन और अगलेगा आइलैंड को लीज़ पर लिया गया।

ये दोनों द्वीप आज चीन की आंखों में किरकिरी बने हुए हैं। क्योंकि वहां से भारत ने पूरे हिंद महासागर पर घेरा बना लिया है। फिलहाल इन द्वीपों पर बुनियादी ढांचा विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। दोनों द्वीपों पर कुछ लोग रहते भी थे, जिन्हें भारतीय सेना ने ही दूसरी जगहों पर घर बनाकर बसा दिया है। अब इन दोनों द्वीपों पर भारतीयों के अलावा किसी को जाने की इजाज़त नहीं है।

पिछले दिनों अमेरिका ने भारत को 22 गार्जियन ड्रोन देने पर रजामंदी जताई है, इन ड्रोन से इस पूरे रीजन के समुद्र पर निगरानी की जाएगी। अमेरिका भी चाहता है कि हिंद महासागर के इस इलाके में चीन को बहुत ताकतवर न होने दिया जाए। लिहाजा वो भारत के साथ सहयोग कर रहा है

दरअसल भारत से दूर दुनिया भर में मिलिट्री बेस बनाने का आइडिया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का था। उनकी सरकार के वक्त इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू भी किया गया था। लेकिन इसी दौरान 2004 में वो चुनाव हार गए। इसके बाद आई मनमोहन सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

10 साल तक इस पर एक भी काम आगे नहीं बढ़ा। 2014 में जब नरेंद्र मोदी की सरकार बनी तो उन्होंने सबसे पहले जो फाइलें क्लियर कीं, उनमें से एक इसके बारे में भी थी। वाजपेयी की सोच थी कि दुनिया में ताकतवर मुल्क बनना है तो कुछ ऐसा करना होगा जिससे कोई दुश्मन आंख उठाकर देखने की भी हिम्मत न करे।

अमेरिका, रूस, ब्रिटेन जैसे देशों ने पूरी दुनिया में ऐसे द्वीपों पर मिलिट्री बेस बना रखे हैं। वाजपेयी के वक्त ही ताजिकिस्तान के फारखोर में भारत ने अपना पहला एयरफोर्स बेस स्थापित किया था। लेकिन हिंद महासागर पर दबदबे का उनका सपना अधूरा रह गया।

अगालेगा और अज़ंप्शन आइलैंड पर फिलहाल सिर्फ भारतीय सेना को जाने की छूट है। दोनों जगहों पर जा चुके नौसेना के एक जवान ने बताया था कि ये दोनों द्वीप बेहद खूबसूरत हैं। चारों तरफ नीले समुद्र से घिरे इन द्वीपों पर अब तक बहुत कम आबादी रही है। सेना की कोशिश है कि यहां की कुदरती खूबसूरती को बनाए रखते हुए यहां के बुनियादी ढांचे का विकास किया जाए।
* हमें गर्व हे हमारे प्रधानमन्त्री माननीय श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी पर *

🔻सभी सम्मानित मित्रों से विनम्र निवेदन है कृपया पोस्ट को अधिक से अधिक #शेयर व #कॉपी_पेस्ट करें, भारतवर्ष के अंतिम व्यक्ति तक सच पहुंचना चाहिए!!🔻🚩

Monday, June 1, 2020

Samay

*चार बुढ़िया थीं।*
*उनमें विवाद का विषय था*
*कि हम में बडी कौन है ?*

जब वे बहस करते-करते
थक गयीं तो उन्होंने तय
किया कि पड़ौस में जो
नयी बहू आयी है,
उसके पास चल कर
फैसला करवायें

वह चारों बहू के पास गयीं।
बहू-बहू ! हमारा फैसला कर दो
कि हम में से कौन बड़ी है ?

बहू ने कहा कि आप
अपना-अपना परिचय दो !

*पहली बुढ़िया ने कहा >*
मैं भूख मैया हूं।मैं बड़ी हूं न?

बहू ने कहा कि >
भूख में विकल्प है ,
५६व्यंजन से भी भूख मिट सकती
है और बासी रोटी से भी !

*दूसरी बुढ़िया ने कहा >*
मैं प्यास मैया हूं,
मैं बड़ी हूं न ?

बहू ने कहा कि >
प्यास में भी विकल्प है,
प्यास गंगाजल और मधुर- रस
से भी शान्त हो जाती है और
वक्त पर तालाब का गन्दा पानी
पीने से भी प्यास बुझ जाती है।

*तीसरी बुढ़िया ने कहा >*
मैं नींद मैया हूं,मैं बड़ी हूं न ?

बहू ने कहा कि >
नींद में भी विकल्प है।
नींद सुकोमल-सेज पर आती है
किन्तु वक्त पर लोग कंकड-पत्थर
पर भी सो जाते हैं।

*अन्त में चौथी बुढ़िया ने कहा >*
मैं आस (आशा) मैया हूं,मैं बड़ी हूं न ?

*बहू ने उसके पैर छूकर कहा कि*
*मैया,आशा का कोई विकल्प नहीं है।*

आशा से मनुष्य सौ बरस भी जीवित
रह सकता है,किन्तु यदि आशा टूट
जाये तो वह जीवित नहीं रह सकता,
भले ही उसके घर में करोडों की
धन दौलत भरी हो।

यह आशा और विश्वास जीवन
की शक्ति है I

संकट जरूर है, वैश्विक भी है.
लेकिन इसी विष में से अमृत निकलेगा.

निश्चित ही मनुष्य विजयी होगा,
मनुष्यता जीतेगी |

तूफान तो आना है ...
आकर चले जाना है ..
बादल है ये कुछ पल का ...
छा कर चले जाना है !!!

        🚩 JAI SHREE RAM🚩

Friday, May 29, 2020

🙏जितनी बार पढ़ेंगें, रो जरूर देंगे🙏
 
 पिताजी, आपने मेरे लिये किया क्या है ?👇

अजी सुनते हो, राहूल को कम्पनी में जाकर टिफ़िन दे आओगे क्या ?

क्यों आज राहूल टिफ़िन लेकर नहीं गया ? शरद राव ने पुछा ।

आज राहूल की कम्पनी के चेयरमैन आ रहे हैं, इसलिये राहूल सुबह 7 बजे ही निकल गया और इतनी सुबह खाना नहीं बन पाया था ।
ठीक है, दे आता हूँ मैं ।

शरद राव ने हाथ का पेपर रख दिया और वो कपडे बदलने के लिये कमरे में चले गये । पुष्पाबाई ने राहत की साँस ली ।

शरद राव तैयार हुए मतलब उसके और राहूल के बीच हुआ विवाद उन्होंने नहीं सुना था ।

विवाद भी कैसा ? हमेशा की तरह राहूल का अपने पिताजी पर दोषारोपण करना और
पुष्पाबाई का अपनी पति के पक्ष में बोलना ।

विषय भी वही ! हमारे पिताजी ने हमारे लिये क्या किया ? मेरे लिये क्या किया है मेरे बाप ने ?

माँ ! मेरे मित्र के पिताजी भी शिक्षक थे, पर देखो उन्होंने कितना बडा बंगला बना लिया । नहीं तो एक ये हमारे पापा (पिताजी)। अभी भी हम किराये के मकान में ही रह रहे हैं ।

राहूल, तुझे मालूम हैं कि तुम्हारे पापा  घर में बडे हैं, और दो बहनों और दो भाईयों की शादी का खर्चा भी उन्होंने उठाया था । सिवाय इसके तुम्हारी बहन की शादी का खर्चा भी उन्होंने ने ही किया था । अपने गांव की जमीन की कोर्ट कचेहरी भी लगी ही रही । ये सारी जवाबदारियाँ किसने उठाई ?

क्या उपयोग हुआ उसका ? उनके भाई - बहन बंगलों में रहते हैं । कभी भी उन्होंने सोचा कि हमारे लिये जिस भाई ने इतने कष्ट उठाये, उसने एक छोटा सा मकान भी नहीं बनाया तो हम ही उन्हें एक मकान बना कर दे दें ।

एक क्षण के लिए पुष्पाबाई की आँखें भर आईं ।

क्या बतायें, अपने जन्म दिये पुत्र को बाप ने क्या किया मेरे लिये पुछ रहा हैं ?

फिर बोली ....
तुम्हारे पापा ने अपना कर्तव्य निभाया । भाई-बहनों से कभी कोई आशा नहीं रखी ।

राहूल मूर्खों जैसी बात करते हुए बोला  - अच्छा वो ठीक है । उन्होंनें हजारों बच्चों की ट्यूशन्स ली । यदि उनसे फीस ले लेते तो आज पैसो में खेल रहे होते ।

आजकल के क्लासेस वालों को देखो । इंपोर्टेड गाड़ियों में घुमते हैं ।

यह तुम सच बोल रहे हो । परन्तु तुम्हारे पापा (पिताजी) का तत्व था, ज्ञान दान का पैसा कभी नहीं लेना ।

उनके इन्हीं तत्वों के कारण उनकी कितनी प्रसिद्धि हुई और कितने पुरस्कार मिलें । उसकी कल्पना हैं तुझे !

ये सुनते ही राहूल एकदम नाराज़ हो गया ।

क्या चाटना हैं उन पुरस्कारों को ? उन पुरस्कारों से घर थोडे ही बनते आयेगा । पड़े - पड़े ही धूल खाते हुए । कोई नहीं पुछता उनको ।

इतने में दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी । राहूल ने दरवाजा खोला तो शरद राव खडे थे ।

पापा ने उनका बोलना तो नहीं सुना इस डर से राहूल का चेहरा उतर गया । परन्तु शरद राव बिना कुछ बोले अन्दर चले गये और वह वाद वहीं खत्म हो गया ।

ये था पुष्पाबाई और राहूल का कल का झगड़ा, पर आज ....

शरद राव ने टिफ़िन साईकिल को  अटकाया और तपती धूप में औद्योगिक क्षेत्र की राहूल की कम्पनी के लिये निकल पड़े ।

7 किलोमीटर दूर कंपनी तक पहुचते - पहुंचते उनका दम फूल गया था । कम्पनी के गेट पर सिक्युरिटी गार्ड ने उन्हें रोक दिया ।

राहूल पाटील साहब का टिफ़िन देना हैं । अन्दर जाँऊ क्या ?

अभी नहीं, साहब आये हुए है, गार्ड बोला ।

चेयरमैन साहब आये हुए हैं । उनके साथ मिटिंग चल रही हैं । किसी भी क्षण वो मिटिंग खत्म कर आ सकते हैं । तुम बाजू में ही रहिये । चेयरमैन साहब को आप दिखना नहीं चाहिये ।

शरद राव थोडी दूरी पर धूप में ही खडे रहे । आसपास कहीं भी छांव नहीं थी ।

थोडी देर बोलते बोलते एक घंटा निकल गया । पांवों में दर्द उठने लगा था ।

इसलिये शरद राव वहीं एक तप्त पत्थर पर बैठने लगे, तभी गेट की आवाज आई, शायद मिटिंग खत्म हो गई होगी ।

चेयरमैन साहेब के पीछे पीछे कई अधिकारी और उनके साथ राहूल भी बाहर आया ।

उसने अपने पिताजी को वहाँ खडे देखा तो मन ही मन नाराज़ हो गया ।

चेयरमैन साहब कार का दरवाजा खोलकर बैठने ही वाले थे तो उनकी नज़र शरद राव की ओर उठ गई ।

कार में न बैठते हुए वो वैसे ही बाहर खड़े रहे ।

वो सामने कौन खडा हैं ? उन्होंने सिक्युरिटी गार्ड से पुछा ।

अपने राहूल सर के पिताजी हैं । उनके लिये खाने का टिफ़िन लेकर आये हैं ।
गार्ड ने कंपकंपाती आवाज में कहा ।

बुलवाइये उनको !

जो नहीं होना था वह हुआ ।

राहूल के तन से पसीने की धाराऐं बहने लगी । क्रोध और डर से उसका दिमाग सुन्न हुआ जान पडने लगा ।

गार्ड के आवाज देने पर शरद राव पास आये ।

चेयरमैन साहब आगे बढे और उनके समीप गये ।

आप पाटील सर हैं ना ? डी एन हाई स्कूल में शिक्षक थे ।

हाँ । आप कैसे पहचानते हो मुझे ?

कुछ समझने के पहले ही चेयरमैन साहब ने शरद राव के चरण छूये । सभी अधिकारी और राहूल वो दृश्य देखकर अचंभित रह गये ।

सर, मैं अतिश अग्रवाल । तुम्हारा विद्यार्थी । आप मुझे घर पर पढ़ाने आते थे ।

हाँ.. हाँ.. याद आया । बाप रे बहुत बडे व्यक्ति बन गये आप तो .....

चेयरमैन हँस दिये । फिर बोले, सर आप यहाँ धूप में क्या कर रहे हैं ? आईये अंदर चलते हैं । बहुत बातें करनी हैं आपसे ।

सिक्युरिटी तुमने इन्हें अन्दर क्यों नहीं बिठाया ?

गार्ड ने शर्म से सिर नीचे झुका लिया ।

वो देखकर शरद राव ही बोले, उनकी कोई गलती नहीं हैं, आपकी मिटिंग चल रही थी । आपको तकलीफ न हो, इसलिये मैं ही बाहर रूक गया ।

ओके... ओके...!

चेयरमैन साहब ने शरद राव का हाथ अपने हाथ में लिया और उनको अपने साथ आलीशन चैम्बर में ले गये ।

बैठिये सर । अपनी कुर्सी की ओर इंगित करते हुए बोले ।

नहीं - नहीं । वो कुर्सी तो आपकी हैं । शरद राव सकपकाते हुए बोले ।

सर, आपके कारण वो कुर्सी मुझे मिली हैं ।
तब पहला हक आपका हैं । चेयरमैन साहब ने जबरदस्ती से उन्हें अपनी कुर्सी पर बिठाया । आपको मालूम नहीं होगा पवार सर ... जनरल मैनेजर की ओर देखते हुए बोले, पाटिल सर नहीं होते तो आज ये कम्पनी नहीं होती और मैं मेरे पिताजी की अनाज की दुकान संभालता रहता ।

राहूल और जी. एम. दोनों आश्चर्य से उनकी ओर देखते ही रहे ।

स्कूल समय में मैं बहुत ही डब्बू विद्यार्थी था । जैसे तैसे मुझे नवीं कक्षा तक पहूँचाया गया । शहर की सबसे अच्छी क्लासेस में मुझे एडमिशन दिलाया गया, परन्तु मेरा ध्यान कभी पढाई में नहीं लगा । उस पर अमीर बाप की औलाद । दिन भर स्कूल में मौज मस्ती और मारपीट करना । शाम की क्लासेस से बंक मार कर मुवी देखना यही मेरा शगल था । माँ को वो सहन नहीं होता । उस समय पाटिल सर कडे अनुशासन और उत्कृष्ट शिक्षक के रूप में प्रसिद्ध थे । माँ ने उनके पास मुझे पढ़ाने की विनती की । परन्तु सर के छोटे से घर में बैठने के लिए जगह ही नहीं थी । इसलिये सर ने पढ़ाने में असमर्थता दर्शाई ।

माँ ने उनसे बहुत विनती की, और हमारे घर आकर पढ़ाने के लिये मुँह मांगी फीस का बोला । सर ने फीस के लिये तो मना कर दिया, परन्तु अनेक प्रकार की विनती करने पर घर आकर पढ़ाने को तैयार हो गये । पहले दिन सर आये । हमेशा की तरह मैं शैतानी करने लगा । सर ने मेरी अच्छी तरह से धुनाई कर दी । उस धुनाई का असर ऐसा हुआ कि मैं चुपचाप बैठने लगा । तुम्हें कहता हूँ राहूल, पहले हफ्ते में ही मुझे पढ़ने में रूचि जागृत हो गई । तत्पश्चात मुझे पढ़ाई के अतिरिक्त कुछ भी सुझाई नहीं देता था । सर इतना अच्छा पढ़ाते थे, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान जैसे विषय जो मुझे कठिन लगते थे वो अब सरल लगने लगे थे । सर कभी आते नहीं थे तो मैं व्यग्र हो जाता था । नवीं कक्षा में मैं दुसरे नम्बर पर आया । माँ-पिताजी को खुब खुशी हुई । मैं तो, जैसे हवा में उड़ने लगा था । दसवीं में मैंने सारी क्लासेस छोड दी और सिर्फ पाटिल सर से ही पढ़ने लगा था और दसवीं में मेरीट में आकर मैंने सबको चौंका दिया था ।

माय गुडनेस...! पर सर फिर भी आपने सर को फीस नहीं दी ?
जनरल मैनेजर ने पुछा !
       
मेरे माँ - पिताजी के साथ मैं सर के घर पेड़े लेकर गया था । पिताजी ने सर को एक लाख रूपये का चेक दिया । सर ने वो नहीं लिया । उस समय सर क्या बोले वो मुझे आज भी याद है ।

सर बोले — मैंने कुछ भी नहीं किया । आपका लडका ही बुद्धिमान है । मैंने सिर्फ़ उसे रास्ता बताया और मैं ज्ञान नहीं बेचता । मैं वो दान देता हूँ । बाद में मैं सर के मार्गदर्शन में ही बारहवीं मे पुनः मेरीट में आया । बाद में बी. ई. करने के बाद अमेरिका जाकर एम. एस. किया और अपने शहर में ही यह कम्पनी शुरु की । एक पत्थर को तराशकर सर ने हीरा बना दिया और मैं ही नहीं तो सर ने ऐसे अनेक असंख्य हीरे बनाये हैं । सर आपको कोटि कोटि प्रणाम !!
चेयरमैन साहब ने अपनी आँखों में आये अश्रु रूमाल से पोंछें ।

परन्तु यह बात तो अदभूत ही हैं कि, बाहर शिक्षा का और ज्ञानदान का बाजार भरा पडा होकर भी सर ने एक रूपया भी न लेते हुए हजारों विद्यार्थियों को पढ़ाया, न केवल पढ़ाये पर उनमें पढ़ने की रूचि भी जगाई । वाह सर मान गये आपको और आपके आदर्श को ।
शरद राव की ओर देखकर जी एम ने कहा ।

अरे सर ! ये व्यक्ति तत्त्वनिष्ठ हैं । पैसों, और मान सम्मान के भूखे भी नहीं हैं । विद्यार्थी का भला हो यही एक मात्र उद्देश्य था । चेयरमैन बोले ।

मेरे पिताजी भी उन्हीं मे से एक । एक समय भूखे रह लेंगे, पर अनाज में मिलावट करके बेचेंगे नहीं ।

ये उनके तत्व थे । जिन्दगी भर उसका पालन किया । ईमानदारी से व्यापार किया । उसका फायदा आज मेरे भाईयों को हो रहा हैं ।

बहुत देर तक कोई कुछ भी नहीं बोला ।

फिर चेयरमैन ने शरद राव से पुछा - सर आपने मकान बदल लिया या उसी मकान में रहते हैं ?

उसी पुराने मकान में रहते हैं सर !
शरद राव के बदले में राहूल ने ही उत्तर दिया ।
   
उस उत्तर में पिताजी के प्रति छिपी नाराज़गी तत्पर चेयरमैन साहब की समझ में आ गई ।

तय रहा फिर । सर आज मैं आपको गुरू दक्षिणा दे रहा हूँ । इसी शहर में मैंने कुछ फ्लैट्स ले रखे हैं, उसमें का एक थ्री बी. एच. के. का मकान आपके नाम कर रहा हूँ ..... क्या ?

शरद राव और राहूल दोनों आश्चर्य चकित रूप से बोलें । नहीं - नहीं इतनी बडी गुरू दक्षिणा नहीं चाहिये मुझे । शरद राव आग्रहपूर्वक बोले ।

चेयरमैन साहब ने शरद राव के हाथ को अपने हाथ में लिया । सर, प्लीज ....  ना मत करिये और मुझे माफ करें । काम की अधिकता में आपकी गुरू दक्षिणा देने में पहले ही बहुत देर हो चुकी हैं ।

फिर राहूल की ओर देखते हुए उन्होंने पुछ लिया, राहूल तुम्हारी शादी हो गई क्या ?

‌नहीं सर, जम गई हैं । और जब तक रहने को अच्छा घर नहीं मिल जाता तब तक शादी नहीं हो सकती । ऐसी शर्त मेरे ससुरजी ने रखी होने से अभी तक शादी की डेट फिक्स नहीं की । तो फिर हाॅल भी बुक नहीं किया ?

चेयरमैन ने फोन उठाया और किसी से बात करने लगे । समाधान कारक चेहरे से फोन रखकर, धीरे से बोले, अब चिंता की कोई बात नहीं । तुम्हारे मेरीज़ गार्डन का काम हो गया । "सागर लान्स" तो मालूम ही होगा !

सर वह तो बहूत महंगा हैं ...

अरे तुझे कहाँ पैसे चुकाने हैं । सर के सारे विद्यार्थी सर के लिये कुछ भी कर सकते हैं । सर के बस एक आवाज़ देने की बात हैं ।

परन्तु सर तत्वनिष्ठ हैं, वैसा करेंगे भी नहीं । इस लान्स का मालिक भी सर का ही विद्यार्थी हैं । उसे मैंने सिर्फ बताया । सिर्फ हाॅल ही नहीं तो भोजन सहित संपूर्ण शादी का खर्चा भी उठाने की जिम्मेदारियाँ ली हैं उसने । वह भी स्वखुशी से । तुम केवल तारीख बताओ और सामान लेकर जाओ ।
बहुत बहुत धन्यवाद सर ।

राहूल अत्यधिक खुशी से हाथ जोडकर बोला । धन्यवाद मुझे नहीं, तुम्हारे पिताश्री को दो राहूल ये उनकी पुण्याई हैं और मुझे एक वचन दो राहूल ! सर के अंतिम सांस तक तुम उन्हें अलग नहीं करोगे और उन्हें कोई दुख भी नहीं होने दोगे ।

मुझे जब भी मालूम चला कि तुम उन्हें दुख दे रहे हो तो, न केवल इस कम्पनी से लात मारकर भगा दुंगा परन्तु पुरे महाराष्ट्र भर के किसी भी स्थान पर नौकरी करने लायक नहीं छोडूंगा । ऐसी व्यवस्था कर दूंगा ।
चेयरमैन साहब कठोर शब्दों में बोले ।

नहीं सर । मैं वचन देता हूँ, वैसा कुछ भी नहीं होगा । राहूल हाथ जोडकर बोला ।

शाम को जब राहूल घर आया तब, शरद राव किताब पढ रहे थे । पुष्पाबाई पास ही सब्जी काट रही थी ।

राहूल ने बैग रखी और शरद राव के पाँव पकडकर बोला - "पापा , मुझसे गलती हो गई । मैं आपको आज तक गलत समझता रहा । मुझे पता नहीं था पापा कि आप इतने बडे व्यक्तित्व लिये हो ।

‌शरद राव ने उसे उठाकर अपने सीने से लगा लिया ।

अपना लडका क्यों रो रहा हैं, पुष्पाबाई की समझ में नहीं आ रहा था । परन्तु कुछ अच्छा घटित हुआ है ।

इसलिये पिता-पुत्र में प्यार उमड़ रहा हैं । ये देखकर उनके नयनों से भी कुछ बूंदे गाल पर लुढक आई ।

एक विनती
☝ यदि पढकर कोई बात अच्छी लगे तो यह पोस्ट किसी स्नेहीज़न को भेजियेगा जरूर ! खाली वक्त में हम कुछ अच्छा भी पढ़ें ।

✍ कृपया अपने पिताजी से कभी यह न कहें कि आपने मेरे लिये किया ही क्या हैं, जो भी कमाना हो वो स्वयं अर्जित करें । जो शिक्षा और संस्कार उन्होंने तुम्हें दिये हैं, वही कमाने के लिए पथप्रदर्शक रहेंगें ..✍

🙏🙏मातृ देवो भवः, पितृ देवो भव:🙏🙏

Wednesday, May 27, 2020

WORLD ENVIRONMENT DAY 5 JUNE

*डर लगता है*

*आमाशय*.......को डर लगता है जब आप सुबह का नाश्ता नहीं करते हैं।
*किडनी* .........को डर लगता है जब आप 24 घण्टों में 10 गिलास पानी भी नहीं पीते।
*गाल ब्लेडर*.............को डर लगता है जब आप 10 बजे रात तक भी सोते नहीं और सूर्योदय तक उठते नहीं हैं।
*छोटी आँत*...........को डर लगता है जब आप ठंडा और बासी भोजन खाते हैं।
*बड़ी आँतों*..........को डर लगता है जब आप तैलीय मसालेदार मांसाहारी भोजन करते हैं।
*फेफड़ों*.........को डर लगता है जब आप सिगरेट और बीड़ी के धुएं, गंदगी और प्रदूषित वातावरण में सांस लेते है।
*लीवर*........को डर लगता है जब आप भारी तला भोजन, जंक और फ़ास्ट फ़ूड खाते है।
*हृदय*...........को डर लगता है जब आप ज्यादा नमक और केलोस्ट्रोल वाला भोजन करते है।
*पैनक्रियाज*.........को डर लगता है जब आप स्वाद और फ्री के चक्कर में अधिक मीठा खाते हैं।
*आँखों*.........को डर लगता है जब आप अंधेरे में मोबाइल और कंप्यूटर के स्क्रीन की लाइट में काम करते है।
और
*मस्तिष्क*.........को डर लगता है जब आप नकारात्मक चिन्तन करते हैं।
आप अपने तन के कलपुर्जों को मत डरायें ।
ये सभी कलपुर्जे बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।
जो उपलब्ध हैं वे बहुत महँगे हैं और शायद आपके शरीर में एडजस्ट भी न हो सकें।

इसलिए अपने शरीर के कलपुर्जों को स्वस्थ रखे।

*विश्व स्वास्थ्य दिवस पर आप  सभी*
*“स्वस्थ रहें ,मस्त रहें, व्यस्त रहें”

LOGO DESIGN


COVID-19


अगर आप 17 वीं या 18 वीं शताब्दी के दस्तावेज पढ़ेंगे तो एक बात पायेंगे 

हम सबको अपने पुराने काल में भारत में लोहे और इस्पात के उत्पादन और उसकी क्षमता के बारे में अच्छे से पता ही होगा ✔️
अपने यहाँ बनने वाला लोहा विश्व प्रसिद्ध था अभी काफी वर्ष पहले एक
शोध से भी पता चला है कि भारत में लोहे का उत्पादन उत्तर प्रदेश के अतिरंजन खेड़ा जैसे स्थानों पर कम से कम 12वीं शताब्दी से हो रहा है 😳👍🏻

लेकिन जो बात काफी कम लोग ही जानते हैं कि 1800 के आस पास भी  देश में यह उद्योग काफी बड़े क्षेत्र में खूब फल फूल रहा था 👌🏻 और उत्पादन की जो तकनीकी थी वो भी अपने चरम पर थी.

एक मोटा मोटा अनुमान है कि 1800 के आस पास देश में ऐसी कोई 10 हजार भट्ठियाँ थी जहाँ लोहे और इस्पात का उत्पादन होता था और एक साल में 35 से 40 सप्ताह काम कर बीस टन इस्पात एक भट्ठी से पैदा किया जाता था ✅ और सबसे बड़ी खास बात इन भट्ठियों की इनका वजन इतना हल्का होता था कि किसी बैलगाड़ी से लादकर इन्हें कहीं भी ले जा सकते थे😳

और बहुत से लोगों को जानकर यह आश्चर्य होगा कि 18वीं शताब्दी में भारत में कृत्रिम तरीके से पानी को ठंडा करके बर्फ बनाई जाती थी और ये कोई ठंडे इलाके में नहीं बनायी जाती थी ये इलाहबाद जैसे गरम इलाकों में बनाई जाती थी 👌🏻✔️

और 1800 से पहले एक अंग्रेज कलेक्टर था उसने भारत के खेती के औजार जिसमें हल भी शामिल था मद्रास से इंग्लैंड भेजे थे ताकि वहाँ के औजारों में कुछ सुधार किया जा सके 👍🏻
तो ये थी हमारी तब की तकनीकी

हमने कहा आपसे सिर्फ दो शताब्दी पहले भारत के ज्यादातर हिस्सों में एक क्रियाशील समाज दिखाई देता था , अब इसका मतलब ये नहीं है कि उसकी अपनी समस्याएँ नहीं थी मतलब साफ है कि उस समाज को भी आंतरिक युद्द झेलने पड़े और सामाजिक और राजनीतिक घटनाएँ भी होती थी, एक समाज दूसरे समाज पर आक्रमण करता और उस पर कब्जा करके लूटपाट शुरू कर देता और यही वजहें थीं कि उसने राज्य व्यवस्था और समाज के बीच एक खाईं बना दी और यही वजह भी है कि समाज टूटा और जिसका खामियाजा आज भी लोग भुगत रहे हैं.

आज फिर उभरते भारत को तोड़ने के लिए लोग फिर से नए नए षड़यंत्र कर रहे हैं लेकिन वो षड़यंत्रकारी फिर मुँह के बल गिरेंगे और खत्म होंगे.

                                          पहले जरूरतों का बाजार था
                                         आज बाजार की जरूरतें हैं

कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के समय में इस बाजार की हकीकत को समझा और इस अंतर को समझ पाया कि आखिर उपभोगवाद की सच्चाई क्या है👍🏻

इस पूरे लेख को एक कहानी का रूप दिया है.

थोड़ा हल्का सा सर में दर्द था तो पास के ही मेडिकल स्टोर पर चला गया और  एक पत्ता दवाई ली, दुकान के मालिक त्रिवेदी जी थे जो उस समय दुकान पर नहीं थे उनके कर्मचारी ने पैसे काटे, हमने पूछा आज त्रिवेदी जी कहाँ हैं वो कर्मचारी बोला कि साहब के सर में दर्द था तो सामने के घर में काढ़ा पीने चले गए हैं......

और हम उस दवाई के पत्ते को लिए हुए मायूसी से देख रहे हैं.......🤔🤔

कई दिनों से चाची जी का ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ा हुआ था और कल रात सही से सो भी नहीं पाई थी तो तड़के सुबह उन्हें लेकर उनके पुराने डॉक्टर के पास गया, डॉक्टर साहब घर के बाहर बने पार्क में लगभग 45 मिनट से योग और व्यायाम कर रहे थे मुझे करीब 1 घण्टे इंतजार करना पड़ा..... क्लीनिक के दरवाजे खोल दिये गए और कुछ देर बाद अचानक डॉक्टर साहब हाथ में एक बोतल जिसमें नींबू पानी भरा हुआ था उसे लेकर आये और चाची की तबियत देखी और एक पर्चे में 5 से 6 मँहगी मँहगी दवाइयां लिख दी.
बड़ी झिझकता से हमने पूछा डॉक्टर साहब आप योग व्यायाम कब से कर रहे हैं उन्होंने कहा करीब करीब 20 साल से और आज उसी की वजह से मैं बिल्कुल स्वस्थ हूँ और ब्लड प्रेशर जैसी कई बीमारियों से बचा हुआ हूँ......

और मैं अपने हाथ में लिए हुए उस पर्चे को देख रहा था जिसमें ब्लड प्रेशर और शुगर कम करने की 5 से 6 दवाइयां लिखी हुई थी.......🤔🤔

कुछ दिन बाद अचानक हमारे घर की ही एक महिला हेयर ट्रीटमेंट के लिए ब्यूटी पार्लर गई उसे 3000 रुपए का पूरा कोर्स करना था तब कहीं जाकर बाल हल्के और मुलायम होंगे.....
बाहर निकलने के बाद मैंने उस ब्यूटी पार्लर की महिला से पूछा आपके इतने अच्छे बाल कैसे हैं वो बोली मैं कुछ नहीं बस नारियल तेल में कपूर और मेथी मिला लेती हूँ तो बाल अपने आप सॉफ्ट हो जाते हैं और जल्दी बढ़ने लगते हैं......

अब मैं अपने घर की उस महिला की शक्ल देख रहा था जो 3000 रुपए अंदर देकर आई थी.........🤔🤔

हमारे यहाँ एक यादव जी हैं उनकी  बड़ी डेयरी है करीब करीब 100 गायें होंगी जो सब के सब अमेरिकन या यूँ कहें जर्सी गाय और बहुत दूध देने वाली मतलब एक एक बार मे 10 से 15 लीटर दूध......
इसी बीच अचानक मेरी नजर पड़ी 2 देशी गायों पर जो इन सबसे अलग थलग घास चर रही थीं हमने पूछा वहीं एक काम करने वाले से कि भाई ये अलग क्यों इन सबसे.......
वो बोले कि इन देशी गायों के दूध और घी का इस्तेमाल साहब अपने परिवार के लिए करते हैं तो इनका दूध बेचा नहीं जाता.

मैं अपने एक हाथ में दूध की बाल्टी पकड़े चुपचाप खड़ा एक दम सन्न बन्न रह गया कि आखिर क्यों इतना खुशी से ब्रांडेड दूध को बेस्ट मानकर खरीदते  हैं......🤔🤔

एक दिन अपने कुछ करीबियों के साथ  शहर के एक बड़े रेस्टोरेंट में खाना खाने गया और हाथ में 2460 का बिल देते हुए बेटर ने बोला सर कैसा लगा खाना?
और आगे मेरे बोलने से पहले ही बोलने लगा कि सर हम खाने में शुद्ध मसाले, तेल और आटेका इस्तेमाल करते हैं हमारी कोशिश रहती है कि आपको बिल्कुल घर जैसा खाना लगे......
तब तक पीछे से एक आवाज आई कि साहब का खाना उनकी टेबल पर रख दो मैं देखकर भौंचक्का रह गया आखिर वही स्टील के तीन डब्बे जो घर से आये हुए थे.......हमने पूछा भइया साहब यहाँ खाना नहीं खाते क्या?
वो बोला कि नहीं साहब सिर्फ अपने घर का ही खाना खाते हैं जहाँ भी जाते हैं उनकी कोशिश रहती है अपना खाना लेकर ही जाए..... और

मैं अपने हाथ मे 2460 का बिल देख रहा था......


आखिर हम जिसे सही जीवन शैली समझते हैं वो हमें जकड़ने और गुमराह करने का मात्र एक जरिया है. हम सिर्फ और सिर्फ कंपनियों की कठपुतली हैं जिसमें अच्छी मार्केटिंग करने वाले लोग पैसा कमा ले जाते हैं और हमारे आप जैसे लोग आज भी दिल्ली ,मुंबई चेन्नई, नोएडा से अपने घर की ओर पैदल निकले थे और आगे भी निकलते रहेंगे.

अक्सर हमें जिन चीनों को बेचा जाता है बेचने वाले उन्हें खुद इस्तेमाल नहीं करते👍🏻

ये जिंदगी के कुछ अनुभव हैं जो हमारे आजतक नहीं समझ आए आपके समझ आ जायें तो हम जैसों को भी कभी समझा देना.........


जरूरी बात:-

पहले जरूरतों का बाजार था
आज बाजार की जरूरतें हैं

Tuesday, May 26, 2020

                                           
दैनिक सुझाव

नौतपा साल के वह 9 दिन होते है जब सूर्य पृथ्वी के सबसे नजदीक रहता है जिस कारण से इन 9 दिनों में भीषण गर्मी पड़ती है इसी कारण से इसे नौतपा कहते हैं।

इस वर्ष 25 मई से 2 जून तक नौतपा है॥

इन दिनों में शरीर तेज़ी से डिहाइड्रेट होता है जिसके कारण डायरिया, पेचिस, उल्टियां होने की संभावना बढ़ जाती है, अतः नीम्बू पानी, लस्सी, मट्ठा (छांछ), खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजे का भरपूर प्रयोग करें, बाहर निकलते समय सिर को ढक कर रखें अन्यथा बाल बहुत तेज़ी से सफेद होंगे, झड़ेंगे।

इन दिनों में पानी खूब पिया और पिलाया जाना चाहिए ताकि पानी की कमी से लोग बीमार न हो। इस तेज गर्मी से बचने के लिए दही, मक्खन और दूध का उपयोग ज्यादा करें । इसके साथ ही नारियल पानी और ठंडक देने वाली दूसरी और भी चीजें खाऐं ।

Drink more water for the next seven days ( 25-May  to 2 June ) due to *EQUINOX(Astronomical event where the Sun is directly above the Earth's equator). Resultantly, the body gets dehydrated very fast during this period. Please share this news to maximum groups.