Monday, March 10, 2025

 अहंकार को मिटाते मिटाते धर्म अहंकार को बडाने मे लगे।


धर्म का सबसे अहम कार्य घमंड अहंकार को समाप्त करना ।घमंड को खत्म करने के लिए भगवान ने अवतार लिए रावण ,हिरण्यकशिपु, दुर्योधन,कंस जैसे अनेको को समाप्त किया गया। धर्म का पहला असर व्यक्ति का अहंकार समाप्त होने लगता है ।


लेकिन अब धार्मीक कहलाने वाले लोगो ने अहंकार दिखाने पर इनाम रखा है। महावीर स्वामी जी को अहंकार के विरूद्ध कह सकते है जिन्होने हर वस्तु त्याग दी कठिनतम तप किए और अब उन्ही के मंदिरो मे अहंकार से बोली लगाई जाती है ध्वजा कि आरती कि मंदिर निर्माण कि ।उची बोली लगाकर वह समाज के सामने आरती कर अहंकार मे रहता है देखो तुम्हारी क्या औकात धन दौलत से मे धर्म भी खरीद लेता हू। यदी व्यक्ति मे अहंकार नही होता तो वह मंदिर मे कभी भी एक दीपक लेकर आरती कर सकता था और बोली भी नही लगानी पडती दान पेटी मे डाल देता । लेकिन जब अहंकार होता है तो वह दिखाना चाहता है समाज के सामने । आज हर धर्म मे   समाज मे हर तरह कि बोली लगाकर समाज मे अहंकार को प्रोत्साहित पुरस्कृत किया जाता है। समाज मे धन इक्कठा करने के लिए धर्म को हि निगल जाते है और संत कहलाते है । गीता मे कृष्ण कहते है दान छुपा कर दिया जाए किसी को पता न चले लेकिन वही धार्मिक लोग अहंकार कि बोली को दान कहने लगे ।

 मैदा के बने खाद्य पदार्थ क्यों नहीं खाने चाहिऐ ?


1. जैसे ही मैदा से बने चीजें - समोसे, कचौरी, ब्रेड, पाव, बिस्किट, खारी, टोस्ट, नानखटाई, पास्ता, बर्गर, पिज्जा, नूडल्स, नाॕन, तंदूरी रोटी आदि खाते हैं, शरीर में शर्करा (शुगर) का लेवल बढ जाता है (क्योंकि मैदा में ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है) इसलिए अग्न्याशय (Pancreas) को पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन छोड़ने के लिए जरूरत से ज्यादा सक्रिय होना पड़ता है। लेकिन मैदा का बहुत अधिक सेवन हो तो इंसुलिन का बनना धीरे-धीरे कम हो जाता है और डायबिटीज हो जाती है।


2. मैदा में अलोक्जल केमिकल होता है जो अग्न्याशय (Pancreas) की इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को मारकर टाइप 2 डायबिटीज पैदा करता है।


3. मैदा कब्ज करता है। क्योंकि इसके कण बहुत ही बारीक हैं, डाइजेसिटिव जूस इसमें मिक्स ना होने से पूरा डाइजेसन नहीं हो पाता है।


4. मैदा को 'सफेद जहर' और 'आंत का गोंद' भी कहते हैं।


5. मैदा से बने ढेरों चीजें एसिडिटी बढाती हैं व इसको बेलेन्स करने के लिए हड्डियों से कैल्शियम सोख लेती है जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, और लम्बे समय तक इनके सेवन से स्थायी सूजन, गठिया आदि कष्टसाध्य बीमारियां हो जाती हैं।


6. अधिक मात्रा में मैदे के सेवन से हानिकारक कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) का बढ़ जाता है। इसके कारण वजन बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर और चित्त में अस्थिरता (मूड स्विंग) की शिकायत हो जाती है।


7. मैदा और इससे बनी चीजों का अधिक मात्रा में सेवन आपको मोटापे की ओर ले जाता है। इसके अलावा, इसके सेवन से आपको अधिक भूख महसूस होती है और मीठा खाने की तलब बढ़ जाती है।


8. मैदा से एलर्जी भी हो सकती है क्योंकि इसमें ग्लूटेन भी ज्यादा होता है।


9. मैदा और इससे बनी चीजें आंतों में चिपक जाते हैं। इसमें पोषक तत्व व फाइबर नहीं होता जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है और फलस्वरूप मेटाबोलिज्म सुस्त पड़ जाता है जिस से अपच की समस्या होने लगती है। 

इसके अलावा यह तनाव, सिरदर्द और माइग्रेन का कारण भी बन जाता है।

 कपालभाती के विषय में अच्छी जानकारी दी है।    


कपालभाती को बीमारी दूर करनेवाले प्राणायाम के रूप में देखा जाता है। मैने ऐसे पेशंट्स को देखा है, जो बिना बैसाखी के चल नही पाते थे, लेकिन नियमित कपालभाती करने के बाद उनकी बैसाखी छूट गई और वे ना सिर्फ चलने, बल्कि दौड़ने भी लगे। कपालभाती करने वाला साधक आत्मनिर्भर और स्वयंपूर्ण हो जाता है।


कपालभाती से हार्ट के ब्लॉकेजेस् पहिले ही दिन से खुलने लगते हैं और 15 दिन में बिना किसी दवाई के वे पूरी तरह खुल जाते है। 


कपालभाती करने वालों के हृदय की कार्यक्षमता बढ़ती है, जबकि हृदय की कार्यक्षमता बढ़ाने वाली कोई भी दवा उपलब्ध नही है। 🌹कपालभाती करनेवालों का हृदय कभी भी अचानक काम करना बंद नही करता, जबकि आजकल बड़ी संख्या में लोग अचानक हृदय बंद होने से मर जाते हैं। 

     

🌹कपालभाती करने से  शरीरांतर्गत और शरीर के ऊपर की किसी भी तरह की गाँठ गल जाती है, क्योंकि कपालभाती से शरीर में जबर्दस्त उर्जा निर्माण होती है, जो गाँठ को गला देती है, फिर वह गाँठ चाहे ब्रेस्ट की हो अथवा अन्य कही की। ब्रेन ट्यूमर हो अथवा ओव्हरी की सिस्ट हो या यूटेरस के अंदर फाइब्रॉईड हो, क्योंकि सबके नाम भले ही अलग हो, लेकिन गाँठ बनने की प्रक्रिया एक ही होती है। 


🌹कपालभाती से बढा हुआ कोलेस्टेरोल कम होता है। खास बात यह है कि, मैं कपालभाती शुरू करने के प्रथम दिन से ही मरीज की कोलेस्टेरॉल की गोली बंद करवाता हूँ।

    

🌹कपालभाती से बढा हुआ इएसआर, युरिक एसिड, एसजीओ, एसजीपीटी, क्रिएटिनाईन, टीएसएच, हार्मोन्स, प्रोलेक्टीन आदि सामान्य स्तर पर आ जाते है। 


🌹कपालभाती करने से हिमोग्लोबिन एक महिने में 12 तक पहुँच जाता है, जबकि हिमोग्लोबिन की एलोपॅथीक गोलियाँ खाकर कभी भी किसी का हिमोग्लोबिन इतना बढ़ नही पाता है। कपालभाती से हीमोग्लोबिन एक वर्ष में 16 से 18 तक हो जाता है। महिलाओं में हिमोग्लोबिन 16 और पुरुषों में 18 होना उत्तम माना जाता है।


🌹कपालभाती से महिलाओं के मासिक धर्म की सभी शिकायतें एक महिने में सामान्य हो जाती है। 


🌹कपालभाती से थायरॉईड की बीमारी एक महिने में ठीक हो जाती है। इसकी गोलियाँ भी पहिले दिन से बंद की जा सकती है।


🌹🌹इतना ही नही, बल्कि कपालभाती करने वाला साधक ५ मिनिट में मन के परे पहुँच जाता है। गुड़ हार्मोन्स का सीक्रेशन होने लगता है। स्ट्रेस हार्मोन्स गायब हो जाते है। मानसिक व शारीरिक थकान नष्ट हो जाती है। इससे मन की एकाग्रता भी आती है। 


कपालभाति के कई विशेष लाभ भी हैं। 


🌹कपालभाती से खून में प्लेटलेट्स बढ़ते हैं। व्हाइट ब्लड सेल्स या रेड ब्लड सेल्स यदि कम या अधिक हुए हो, तो वे निर्धारित मात्रा में आकर संतुलित हो जाते हैं

🌹कपालभाती से सभी कुछ संतुलित हो जाता है। ना तो कोई अंडरवेट रहता है, ना ही कोई ओव्हरवेट रहता है। अंडरवेट या ओव्हरवेट होना, दोनों ही बीमारियाँ है।

     

🌹कपालभाती से कोलायटीस, अल्सरीटिव्ह कोलायटीस, अपच, मंदाग्नी, संग्रहणी, जीर्ण संग्रहणी, आँव जैसी बीमारियाँ ठीक होती है। काँस्टीपेशन, गैसेस, एसिडिटी भी ठीक हो जाती है। पेट की समस्त बीमारियाँ ठीक हो जाती है।


🌹कपालभाती से सफेद दाग, सोरायसिस, एक्झिमा, ल्युकोडर्मा, स्कियोडर्मा जैसे त्वचारोग ठीक होते हैं। स्कियोडर्मा पर कोई दवाई उपलब्ध नही है, लेकिन यह कपालभाती से ठीक हो जाता है। अधिकतर त्वचा रोग पेट की खराबी से होते है। जैसे जैसे पेट ठीक होता है, ये रोग भी ठीक होने लगते हैं।


🌹कपालभाती से छोटी आँत को शक्ति प्राप्त होती है, जिससे पाचन क्रिया सुधर जाती है। पाचन ठीक होने से शरीर को कैल्शियम, मैग्नेशियम, फॉस्फरस, प्रोटीन्स इत्यादि उपलब्ध होने से कुशन्स, लिगैमेंट्स, हड्डियाँ ठीक होने लगती हैं और 3 से 9 महिनों में अर्थ्राइटीस, एस्ट्रो अर्थ्राइटीस, एस्ट्रो पोरोसिस जैसे हड्डियों के रोग हमेशा के लिए ठीक हो जाते हैं। 


ध्यान रखिये की कैल्शियम, प्रोटीन्स, हिमोग्लोबिन, व्हिटैमिन्स आदि को शरीर बिना पचाए, बाहर निकाल देता है, क्योंकि केमिकल्स से बनाई हुई इस प्रकार की औषधियों को शरीर द्वारा सोखे जाने की प्रक्रिया हमारे शरीर के प्रकृति में ही नही है।


💐हमारे शरीर में रोज 10 % बोनमास चेंज होता रहता है। यह प्रक्रिया जन्म से मृत्यु तक निरंतर चलती रहती है। अगर किसी कारणवश यह बंद हुई, तो हड्डियों के विकार हो जाते हैं।💐 🌹🌹🌹कपालभाती इस प्रक्रिया को निरंतर चालू रखती है। इसीलिए कपालभाती नियमित रूप से करना आवश्यक है।


सोचिए, यह सिर्फ एक क्रिया कितनी लाभकारी है। इसीलिए नियमित रूप से कपालभाति करना, यह एक उत्तम व्यायाम प्रक्रिया है।कपाल भांति ने वह कमी पूरी कर रखी है। नित्य दस पंद्रह मिनट पर्याप्त होते हैं ।

शशिरंजनभट्ट